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ISP meaning: ISP क्या है – ISP Full Form – ISP examples in Hindi

Internet Service Provider ( ISP) – आज के समय में आप इंटरनेट की उपयोगिता के बारे में तो जानते ही होंगे और इसके बिना हम एक पल भी नहीं रह सकते क्योंकि इसके बगैर कोई भी ऑनलाइन काम नहीं हो सकता इसलिए इंटरनेट आज के व्यक्तियों के लिए एक आम बात बन गई है इसलिए आपको इंटरनेट के बारे में जानना जरूरी है इंटरनेट का कोई एक मालिक नहीं है बल्कि इंटरनेट को प्रोवाइड करने के लिए अलग-अलग कंपनी होते हैं आईएसपी का पूरा नाम इंडियन सर्विस प्रोवाइडर होता है| इस पोस्ट में हम जानेगे की ISP और इसके उदहारण क्या है

ISP

इसलिए आईएसपी एक ऐसी कंपनी है जो इंटरनेट एक्सेस प्रदान करती है अगर शब्दों में कहा जाए तो आईएसपी इंटरनेट का गेटवे ( Gateway)  भी है भारत में मुख्य रूप से बीएसएनल (भारत संचार सरकार लिमिटेड) यह इंटरनेट उपलब्ध कराती है तथा इसके अलावा रिलायंस, एयरटेल आदि भी इन्टरनेट सेवा उपलब्ध कराती है।

इंटरनेट पर ऑनलाइन काम  करने के लिए काम  के बदले में पप्रयोक्ता अपने हिस्से का भुगतान करता है अर्थात जिसे हम आम भाषा में कहते हैं कि रिचार्ज कराना है सामान्यता इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर दो तरह की एकाउंट होती हैं
1. इंटरनेट प्रयोग करने के लिए और
2. इंटरनेट कनेक्शन देने के लिए।
इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर की सभी ग्राहकों को इंटरनेट प्रयोग के बदले में अमाउंट का भुगतान करना ही पड़ता है ज्यादातर इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर प्रयोग प्रयोक्ताओ  पर एक निश्चित प्रति माह अकाउंट लेती हैं इस योजना में प्रयोक्ता को एक निश्चित समय की अवधि तथा इसके साथ-साथ कम्युनिकेशन दूरी तथा डाटा डाउनलोड की मात्रा भी दी जाती है।
भारत में इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी – आज के समय में भारत में 358 से भी ज्यादा इंटरनेट सेवा प्रदाता हैं जैसे भारत में  निम्न कपनियां सेवाएं देती है – सत्यम (satyam) बीएसएनल (BSNL), एमटीएनएल (MTNL), (Jio)जिओ , एयरटेल (Airtel), आइडिया( Idea)  आदि ।
ISP के प्रकार – इसके विभिन्न प्रकार निम्न है –
1. एक्सेस प्रदाता (Access provide) – ISP  इंटरनेट सेवा प्रदान करती है प्रयोक्ता को अपनी नेटवर्क कनेक्शन से कनेक्ट करने के लिए कई तकनीकों को नियोजित करता है छोटे व्यवसाय या  उपयोगकर्ताओं के लिए पारस्परिक विकल्पों में डायल अप ,  डीएसएल (DSL), विशेष रूप से असममित डिजिटल लाइन (ADSL), बेबल मॉडेम या इंटीग्रेटेड सर्विसेज डिजिटल नेटवर्क प्रदान करने के लिए तांबा तार आदि शामिल हैं। उपयोगकर्ताओं का रिचार्ज खत्म होने पर उन्हें इंटरनेट से समाप्त करने के लिए फाइबर ऑप्टिक्स का इस्तेमाल करता है तथा इसके अलावा दे की स्पीड वाली नेट के लिए बड़ी व्यवसायों में अन्य आईएसपी को चुनौती वाले सिग्नल की आवश्यकता होती है जिसके लिए चुनौती वाले डीएसएल आईएसपी का उपयोग किया जाता है।

2.मेलबॉक्स प्रदाता ( mailbox providers ) – मेल बॉक्स प्रदाता एक एक्सेस मेल बॉक्स का संगठन होता है जिसमें मेल बॉक्स के लिए भंडारण तक पहुंच कर इलेक्ट्रॉनिक मेल जैसी हम आम बोलचाल में ईमेल भी कहते हैं के लिए सेवा प्रदान करती है।

3. होस्टिंग ISP – इंटरनेट होस्टिंग सीमा ईमेल वेब होस्टिंग या ऑनलाइन संग्रह में सेवा प्रदान करती हैं तथा और अनेक सेवा में वर्चुअल सर्वर क्लाउड सेवाओं या भौतिक सर्वर आदि ऑपरेशन शामिल होते हैं।
4. पारगमन ISP ( transit ISP ) – जैसे ही जिस कंपनी के ग्राहक या प्रयोक्ता इंटरनेट एक्सेस के लिए कंपनी को भुगतान करते हैं वैसे ही उन्हें इंटरनेट की सेवा प्रदान कर दी जाते हैं आईएसपी खुद इंटरनेट एक्सेस के लिए आईएसपी का भुगतान करते हैं एक अपस्ट्रीम आईएसपी के लिए एक कनेक्शन स्थापित किया गया है और इसे घर नेटवर्क से वंचित इंटरनेट क्षेत्रों में डाटा भेजने के लिए इसका उपयोग किया जाता।
5. आभासी ISP ( virtual ISP ) – एक वर्चुअल आईएसपी एक ऐसा ऑपरेशन है जो आईएसपीसी से  सेवाओं को खरीदता है जिससे कभी-कभी वर्चुअल आईएसपी को थोक आईएसपी भी  कहा जाता है VISPs आवाज संचार के लिए मोबाइल वर्चुअल नेटवर्क ऑपरेटर और सर्दी स्थानी एक्सचेंज कैरियर के समान है।
6. निः शुल्क ISP ( free ISP ) – नेहा शुल्क आईएसपी इंटरनेट सेवा प्रदाता है जो फ्री में सेवा प्रदान करती हैं कई नेहा शुल्क आईएसपी विज्ञापन प्रदर्शित करते समय उपयोगकर्ता से कनेक्ट होती हैं वाणिज्य टेलीविजन की तरह एक तरह से ही विज्ञापनदाता को उपयोगकर्ता का ध्यान बेच रही है जबकि अन्य फ्री आईएसपी जिन्हें फ्री नेट कहा जाता है एक गैर लाभकारी आधार पर चलाये जाते है।
7. वायरलेस ISP ( wireless ISP ) – वायरलेस इंटरनेट सेवा प्रदाता (wips) वायरलेस नेटवर्किंग पर आधारित नेटवर्क के साथ इंटरनेट सेवा प्रदाता है
ISPs ke स्तर ( levels of ISPs ) – इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के मुख्य तीन स्तर होते हैं जिन्हें हम टियर-1 टियर-2 टियर-3 कहते हैं तो चलिए अब इन्हें समझते है
  • Tier-1 – Tier-1 स्तर की आईएसपीएस, आईएसपी अनुक्रम में सबसे बड़े होते हैं इसलिए इन्हें इंटरनेट का बैकबोन ( backbone )  भी कहा जाता है इनकी पहुंच वैश्विक स्तर पर होती है अर्थात इनकी मदद से ही एक देश दूसरे देश में इंटरनेट सर्विस को पहुचात है टियर-1 आईएसपी के बिना इंटरनेट ट्रैफिक एक देश से दूसरे देश में नहीं भेजा जा सकता है इसके मुख्य उदाहरण है जैसे – tata Communication, AT&T, verzion sprint etc.
  • Tier-2 – टीयर-दो,  दोनों आईएसपी अर्थात् टियर-1 और टियर-3 आईएस पी के बीच में कार्य करते हैं टियर-2 की पहुंच या इसका स्तर क्षेत्रीय देश के भीतर तक ही सीमित रहता है इसमें पियरिंग एग्रीमेंट के साथ-साथ ट्रांसिट द्वारा इंटरनेट ट्रैफिक में परिवर्तन किया जाता है इसके उदाहरण है Jio, Airtel, Idea, Vodafone, BSNL etc.
  • Tier-3 टियर-3 स्तर की आईएसपी अपने ट्रैफिक के अनुसार tier-2 आईएसपी इंटरनेट खरीदते हैं इस प्रकार की आईएसपी ग्राहकों से शुल्क  लेते हैं और इनका काम अंतिम ग्राहक यानी घरों और कार्यक्षेत्र, ऑफिस तक इंटरनेट की सुविधा प्रदान करता है इसके उदाहरण निम्न है Tikona, Den Broadband, excitel etc.
ISP की अवधारणा ( concept of internet service provider ) – 
सन 1984 में सबसे पहले इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनी संयुक्त राज्य अमेरिका ( यूएसए )  में स्थापित की गई थी तथा भारत में पहली सार्वजनिक रूप से इंटरनेट सेवा 15 अगस्त 1995 में वीएसएनल ( विदेश संचार सरकार लिमिटेड ) को इंटरनेट से कनेक्ट करने के लिए बीएसएनएल कंपनी की स्थापना की गई। किसी भी डिवाइस को इंटरनेट से कनेक्ट करने के लिए चाहे वह कंप्यूटर मोबाइल लैपटॉप या कोई भी डिवाइस ओ को इंटरनेट से कनेक्ट करने के लिए आईएसपी की जरूरत होती है आईएसपी एक गेटवे ( gateway )  अर्थात प्रवेश द्वार की तरह कार्य करता है। इस प्रवेश द्वार को पार करने के बाद यूजर इंटरनेट का उपयोग कर सकता है और अपना ऑनलाइन काम जारी रख सकता है।
आशा है की इस पोस्ट को पढने के बाद आप इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर को अच्छी तरह से समझ गये होगे और यह भी जन गये होगे की इन्टरनेटका उपयोग करने  के लिए इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर की कितनी आवश्यकता है |

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